Ep. 37: ये लिबरल आख़िर है कौन?

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लिबरलिस्म अर्थात स्वातंत्रवाद आज एक विस्फोटक शब्द हो गया है | लेकिन ये लिबरल होने का आख़िर मतलब क्या होता है? इस प्रश्न का उत्तर खोजते हुए हम फ्रेडरिक हायेक (1899-1992) के लेख पढ़ने लगे | हायेक लिबरल विचारधारा की एक महत्वपूर्ण हस्ती है | The Use of Knowledge in Society, The Road to Serfdom और Law, Legislation, and Liberty हायेक के कुछ धमाकेदार लेख है जो आज भी बेहद प्रासंगिक है | उनकी पहली किताब के प्रकाशन को हाल ही ७५ साल हुए तो हमने सोचा उनके विचारों से हमारे श्रोताओं को अवगत कराया जाए |

लिबरल विचारधारा और हायेक की इन रचनाओं पर चर्चा करने के लिए हमारे साथ है अमित वर्मा | अमित एक लेखक और पॉडकास्टर है | अमित कई अखबारों में लिबरलिस्म, क्रिकेट, और राजनीति जैसे विषयों पर लिखते हैं | उनका अंग्रेजी पॉडकास्ट The Seen and The Unseen भारत के श्रेष्ठ पॉडकास्ट में से एक है |

Every “-ism” is built on a set of canonical ideas and influential personalities. And one such leading thinker behind the liberalism philosophy is Friedrich August Hayek (1899-1992). His landmark book The Road to Serfdom completed 75 years recently. This book was meant to warn readers that government regulation of our economic lives amounts to totalitarianism.

In another influential essay The Use of Knowledge in Society, Hayek writes that a centrally planned economy can never match the efficiency of the open market because what is known by a single agent is only a small fraction of the sum total of knowledge held by all members of society.

In this episode, Amit Varma joins us to discuss the relevance of Hayek’s key ideas in today’s India. Amit is a writer and commentator who won the Bastiat Prize for Journalism in 2007. Today, he is one of the few original thinkers on liberalism in India. He is known for his blog India Uncut and his podcast The Seen and The Unseen. He also edited the ThinkPragati magazine between 2016 and 2018.

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Ep. 34: हमारी राजनीति आख़िर ऐसी क्यों है?

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2019 मतदान क़रीब है और राजनीति की हवा किस दिशा में बह रही है, इस पर हर भारतीय का अपना एक मत तो ज़रूर है| अक़्सर लोग कहते हैं कि भारत में राजनीति विचारधाराओं से परे है ; वह केवल नेताओं के व्यक्तित्व, भ्रष्टाचार, या फ़िर जातिगत समीकरण पर केंद्रित है | पर इन आम धारणाओं में कितना सच है, इसी विषय पर इस हफ़्ते की पुलियाबाज़ी राहुल वर्मा (फेलो, राहुल सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च) के साथ| राहुल और प्रदीप छिब्बर की नई किताब Ideology & Identity: The Changing Party Systems of India भारतीय राजनीति की संरचना पर एक गहन अध्ययन है |

राहुल से हमने इन सवालों पर पुलियाबाज़ी की:

भारतीय राजनीति की विचारधारा के स्तंभ क्या है?
स्वतंत्र होने से पहले क्या सोच थी सरकार के समाज में रोल के बारे में ? स्वतंत्र भारत में क्या कहानी रही है?
क्या वोट खरीदने से ही सरकारें बन जाती हैं?
क्या जाति सबसे बड़ा फैक्टर है हमारी राजनीति में?
नेताओं के व्यक्तित्व का क्या असर होता है वोटर पर?
एक और मान्यता है कि काडर (संगठन) वाली पार्टिया सफल होती है | कितना सच है इसमें?
२०१४ में जो नतीजा आया वह क्यों आया?

The 2019 elections are around the corner. Instead of adding to the chatter on electoral predictions, we present an in-depth chat with Rahul Verma (Fellow, Centre for Policy Research) on the structure of Indian politics. Rahul is the co-author of Ideology & Identity: The Changing Party Systems of India, a book that challenges common assumptions that Indian polity is chaotic, clientelistic, corrupt, and devoid of any ideology. Instead, they claim that the most important ideological debates in India are centred on statism-the extent to which the state should dominate and regulate society-and recognition-whether and how the state should accommodate various marginalised groups and protect minority rights from majorities.

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Ep. 33: बुंदेलखंड से उठती खबरों की एक लहर

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इस बार की पुलियाबाज़ी भारत के एकमात्र ग्रामीण, नारीवादी न्यूज़ चैनल - ख़बर लहरिया - के साथ | २००२ में स्थापित हुआ यह नेटवर्क अपनी बेबाक रिपोर्टिंग के लिए मशहूर है | तो हमने पुलियाबाज़ी की दिशा मलिक (मैनेजिंग डायरेक्टर) और कविता देवी (डिजिटल हेड) के साथ | पहले हमने बात की खबर लहरिया की सफलताएँ और चुनौतियाँ के बारे में | फ़िर हमने समझने की कोशिश की उत्तर प्रदेश के पिछड़े इलाक़े - बुंदेलखंड - को, ख़बर लहरिया के दृष्टिकोण से |

This episode of Puliyabaazi is on India’s only women-run rural media network - Khabar Lahariya. Employing women from Dalit, tribal, Muslim and backward castes, the network has won several national and global awards for their pioneering rural journalism. We spoke to Disha Mullick, Managing Director and Kavita Devi, Digital Head from the Khabar Lahariya team about:
How did Khabar Lahariya start? What have been some stages in KL’s development since it came into being in 2002?
What challenges do KL’s women reporters face while investigating issues in a patriarchal society?
How is rural Bundelkhand like? What are some changes that KL has noticed in governance over the years?

सुनिए और बताइये कैसा लगा यह एपिसोड आपको|

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Ep. 20: परमाणु हथियार:इस ब्रह्मास्त्र से कैसे बचें?

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इस साल के शुरू होते ही अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक ट्वीट में उत्तर कोरिया को चेताया था कि अमरीका के परमाणु हथियार उत्तर कोरिया के मुक़ाबले कई ज़्यादा प्रभावशाली है | इस एक ट्वीट से ही सारी दुनिया काँप गयी थी | तो इस पुलियाबाज़ी में हमने परमाणु हथियार और उनकी राजनीति पर ग़ौर किया लेफ्टिनेंट जनरल प्रकाश मेनन के साथ |

जनरल मेनन ४० साल सैन्य विषयों पर काम कर चुके है | उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल सहित कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया है | आजकल वे तक्षशिला इंस्टीट्नयूशन में स्ट्रैटिजिक नीति के बुनियादी सिद्धांत सिखाते है | जनरल मेनन की किताब The Strategy Trap भारत, पाकिस्तान और चीन की परमाणु नीतियों का विश्लेषण करती है |