Ep. 33: बुंदेलखंड से उठती खबरों की एक लहर

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इस बार की पुलियाबाज़ी भारत के एकमात्र ग्रामीण, नारीवादी न्यूज़ चैनल - ख़बर लहरिया - के साथ | २००२ में स्थापित हुआ यह नेटवर्क अपनी बेबाक रिपोर्टिंग के लिए मशहूर है | तो हमने पुलियाबाज़ी की दिशा मलिक (मैनेजिंग डायरेक्टर) और कविता देवी (डिजिटल हेड) के साथ | पहले हमने बात की खबर लहरिया की सफलताएँ और चुनौतियाँ के बारे में | फ़िर हमने समझने की कोशिश की उत्तर प्रदेश के पिछड़े इलाक़े - बुंदेलखंड - को, ख़बर लहरिया के दृष्टिकोण से |

This episode of Puliyabaazi is on India’s only women-run rural media network - Khabar Lahariya. Employing women from Dalit, tribal, Muslim and backward castes, the network has won several national and global awards for their pioneering rural journalism. We spoke to Disha Mullick, Managing Director and Kavita Devi, Digital Head from the Khabar Lahariya team about:
How did Khabar Lahariya start? What have been some stages in KL’s development since it came into being in 2002?
What challenges do KL’s women reporters face while investigating issues in a patriarchal society?
How is rural Bundelkhand like? What are some changes that KL has noticed in governance over the years?

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Ep. 32: IL&FS से DHFL तक - क्यों लड़खड़ा रहे हैं NBFC?

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भारत में तक़रीबन 90 बैंक है पर 10000 ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियाँ (NBFC) हैं जबकि दोनों संस्थाओं का एक ही रोल है - किफ़ायती क़र्ज़ उपलब्ध करा पाना | कोबरापोस्ट वेबसाइट ने इनमें से एक - DHFL - पर जनवरी में आरोप लगाया था कि इस कम्पनी ने 31 हजार करोड़ रुपए का घोटाला किया है! इसे ‘भारत के इतिहास का सबसे बड़ा बैंकिंग स्कैम’ करार दिया गया था।भारत में ही नहीं, पूरे विश्व में NBFC पर नियंत्रण कैसे हो यह एक ज्वलंत विषय है | तो इस एपिसोड में हमने कोशिश की समझने की यह NBFC बला क्या है? इस विषय पर पुलियाबाज़ी के लिए हमारे साथ है दो विशेषज्ञ - हर्ष वर्धन और नारायण रामचंद्रन | हर्ष एसपी जैन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (SPJIMR) में फेलो है | नारायण एक इन्वेस्टर, लेखक, और तक्षशिला इंस्टीटूशन में सीनियर फेलो हैं | इससे पहले नारायण मॉर्गन स्टैनली इंडिया के प्रमुख और RBL बैंक के ग़ैर-कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके है | इस विषय पर पढ़िए हर्ष के विचार ब्लूमबर्गक्विंट पर और नारायण का लेख मिंट अखबार में|

इस पुलियाबाज़ी में हमने उनके सामने यह सवाल रखे:
ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी मतलब NBFC क्या होती है?
NBFC और मिक्रोफिनांस संस्थाओं में क्या अंतर है?
इस तरह की कम्पनियों का भारत में फैलाव कैसा रहा है?
क्या यह फैलाव दुसरे देशों के समरूप रहा है या फिर भारत की अर्थव्यवस्था में NBFC का प्रचलन ज़्यादा/कम है? और ऐसा क्यों?
IL&FS कर्ज पर ब्याज की किश्त चुकाने में असमर्थ रही है। क्या इस वाक़िये से NBFC पर कुछ फर्क पड़ा है?
NBFC पर रेगुलेशन में हम कोताई बरत रहे है | तो क्या ग़लत है और उसे ठीक कैसे किया जाए?

Soon after IL&FS scam in October 2018 comes another one in January 2019 - the DHFL scam. Terming this as India’s biggest ever banking scam, investigative website Cobrapost alleged a misuse of an astronomical sum of 31,000 crores. Both these companies are classified as Non-Banking Financial Companies (NBFCs). So in this episode, we return to a core issue in the Indian economy - why are they falling apart and how to regulate such institutions. And why do we even need NBFCs in our economy. Harsh Vardhan (Fellow at the Centre for Financial Services, SPJIMR) and Narayan Ramachandran (Senior Fellow, Takshashila Institution) join us as guests for a puliyabaazi on this issue.

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Ep. 15: एक डॉक्टर और

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भारत में हर 1668 लोगों के लिए सिर्फ एक डॉक्टर है । इस अभाव के बावजूद मेडिकल कॉलेजों में सीटें इस साल घटा देने का कारण क्या है? राज्य और केंद्र सरकार क्या कर सकती हैं अच्छे डॉक्टरों की संख्या में इज़ाफ़ा करने के लिए, जानिए इस एपिसोड में। इस विषय पर हमारे सह-पुलियाबाज़ है संबित दाश जो मेलाका मणिपाल मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर है। संबित के मेडिकल शिक्षा पर लेख Mint और EPW में पढ़िए।


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