Ep. 25: परदेसी परदेसी जाना नहीं

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‘मेरे पिया गए रंगून, वहाँ से किया है टेलीफून” याद आया न यह गाना? लेकिन आपने सोचा कि इनके पिया आख़िर क्यों और कैसे रंगून पहुंचे? आम धारणा यह है कि भारत में अक़्सर लोग जिस गाँव में जन्म लेते थे, उसी में पूरा जीवन व्यतीत कर देते थे | लेकिन हमारे इस एपिसोड के सह-पुलियाबाज़ चिन्मय तुम्बे बताते है कि भारत का प्रवास याने कि migration के साथ अटूट रिश्ता है | चिन्मय १० साल से migration पर शोध कर रहे है और उन्होंने अपनी किताब India Moving: A History of Migration में भारतीय समाज और migration के कई अनोखे किस्सों का अध्ययन किया है | आपको ज़रूर मज़ा आएगा यह एपिसोड सुनकर!

Everyone of us has a migration story. And yet the term migrant often becomes problematic. So in this week’s Puliyabaazi, we spoke to Chinmay Tumbe, a scholar of Indian migrations and author of the magisterial India Moving: A History of Migration. We discussed Indian communities that are prolific at migration. We also discussed if there is anything like a ‘good migrant’.

Ep. 24: धरती के बर्फीले छोरों से कहानी Climate Change की

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जलवायु परिवर्तन (climate change) के भीषण प्रभावों पर आंकड़े तो स्पष्ट हैं लेकिन फिर भी हम और हमारी सरकारें इस वैश्विक समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे | तो इस पुलियाबाज़ी में हमने सीधे बात की ऐसे क्लाइमेट सेनानी से जो क्लाइमेट चेंज के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए धरती के दोनों बर्फीले ध्रुवों तक ही पहुँच गए | सुनिए हमारी पुलियाबाज़ी राजा कार्तिकेय से जिन्होंने एक साल के भीतर ही अंटार्कटिक और आर्कटिक ध्रुवों का दौरा किया | पेशे से राजा सयुंक्त राष्ट्र में राजनैतिक अफ़सर है और उनकी अपनी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है |

उन्होंने समझाया कि आज के क्लाइमेट में बदलाव का कारण भले ही पश्चिमी देश हो पर इसका भारत जैसे देशों पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा | न सिर्फ तटवर्ती इलाक़े बल्कि भारत के अंदरूनी उत्तरी भाग भी इससे बदल जाएंगे | इसीलिए हमारे समाज और सरकारों को इस समस्या का सामना करने की तैयारी आज करनी होगी | तो क्या है वह कदम, जानने के लिए शामिल हो जाइये इस पुलियाबाज़ी में |

Ep. 23: Arthashashtra Part 2: Foreign Policy कैसी होनी चाहिए?

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Real estate से लेकर business advice तक, कौटिल्य नीति को बिना सिर पैर उपयोग करने की होड़ लगी है आजकल | अर्थशास्त्र को ignore करना तो ग़लत है ही, पर उसे ग़लत समझना और भी हानिकारक है | तो कौटिल्य अर्थशास्त्र से जुड़ी कई ग़लतफ़हमियों को ठीक करने के लिए हमने की पुलियाबाज़ी कजरी कमल से जो कि ‘अर्थशास्त्र और Indian Strategic Culture’ पर PhD कर रही हैं हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय से | कजरी तक्षशिला इंस्टीटूशन के Graduate certificate in Strategic Studies में ‘अर्थशास्त्र और भारतीय विदेश नीति’ course पढ़ाती है |

यह पुलियाबाज़ी दो भागों में है | पहले भाग में सुनिए चर्चा अर्थशास्त्र के उद्देश्य और मूलतत्वों पर | दूसरे एपिसोड में सुनिए कि चाणक्य विदेश नीति के बारे में क्या सिखाते है |

Ep. 22: Arthashashtra Part 1: साम, दाम, भेद, दंड से परे

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Real estate से लेकर business advice तक, कौटिल्य नीति को बिना सिर पैर उपयोग करने की होड़ लगी है आजकल | अर्थशास्त्र को ignore करना तो ग़लत है ही, पर उसे ग़लत समझना और भी हानिकारक है | तो कौटिल्य अर्थशास्त्र से जुड़ी कई ग़लतफ़हमियों को ठीक करने के लिए हमने की पुलियाबाज़ी कजरी कमल से जो कि ‘अर्थशास्त्र और Indian Strategic Culture’ पर PhD कर रही हैं हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय से | कजरी तक्षशिला इंस्टीटूशन के Graduate certificate in Strategic Studies में ‘अर्थशास्त्र और भारतीय विदेश नीति’ course पढ़ाती है |

यह पुलियाबाज़ी दो भागों में है | पहले भाग में सुनिए चर्चा अर्थशास्त्र के उद्देश्य और मूलतत्वों पर | दुसरे एपिसोड में सुनिए कि चाणक्य विदेश नीति के बारे में क्या सिखाते है |