Ep. 27: एक नई विश्व व्यवस्था के लिए भारत कैसे तैयारी करे?

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विश्व व्यवस्था के घटनाक्रम में हाल ही तीव्रता से बदलाव हुए हैं। अमरीका और चीन के बीच में 1971 से शुरू हुआ तालमेल का सिलसिला आज एक शीत युद्ध में तब्दील हो गया है। बदलते समीकरणों के चलते अगले २५ सालों में भारत को क्या कदम उठाने चाहिए, इस विषय पर है हमारी इस हफ़्ते की पुलियाबाज़ी |

इस पुलियाबाज़ी में सौरभ और प्रणय ने इन सवालों पर चर्चा की:

१. “विश्व-व्यवस्था” शब्द का अर्थ क्या है?
२. ऐतिहासिक तौर पर किस प्रकार की विश्व-व्यवस्थाएं रह चुकी है?
३. अमरीका और चीन के मनमुटाव के चलते भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा?
४. विश्व-व्यवस्था में आख़िर बदलाव अब क्यों आ रहा है?
५. क्या चीन अमरीका को विश्व के सबसे ताक़तवर देश के रूप में विस्थापित कर सकता है?

सुनिए और कहिए कैसा लगा आपको @puliyabaazi या फिर puliyabaazi@gmail.com पर।

It’s nearly impossible to read a book on geopolitics today without the mention of the phrase A New World Order. Many claims of this New World Order narrative need deeper investigation, starting from these questions: what constitutes a world order? How was the US able to reach this position of a world leader after the World War II? What are the odds that China will replicate this feat? And finally, in what ways can India shape the world order?

These are the questions we tackle in this week’s episode.

Recommended reading and listening on this topic:
Takshashila Discussion Document on ‘India’s Strategies for a New World Order’
Pranay Kotasthane on ‘Ingredients of a New World Order’
The Pragati Podcast episode on ‘A New Brave World Order’
Opinion piece in Rajasthan Patrika ‘भारत कैसे तैयारी करें नयी विश्व-व्यवस्था से निपटने के लिए’ If you have any comments or questions please write to us at puliyabaazi@gmail.com
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Ep. 26: भाग रॉकेट भाग: भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम की कहानी

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अंतरिक्ष खोजने की चाह हज़ारों साल पुरानी है। लेकिन अंतरिक्ष तक पहुंचने की क्षमता केवल सत्तर साल पुरानी है। और भारत उन चुनिंदा देशों में से है जिसने इस खोज में कई झंडे गाढ़े है। तो इस बार पुलियाबाज़ी में हमने भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम पर खुलकर चर्चा की पवन श्रीनाथ से, जो इस विषय पर काफ़ी सालों से शोधकार्य कर रहे हैं। पवन तक्षशिला संस्थान में फेलो है और थले-हरटे (कन्नड) और प्रगति (अंग्रेज़ी) पॉडकास्ट के होस्ट है। हमने इन सवालों पर बातें की इस एपिसोड में:
1. एक ग़रीब देश के अंतरिक्ष प्रोग्राम को स्थापित करने की सोच कहाँ से शुरू हुई?
2. किस तरह यह प्रोग्राम दिल्ली से दूर कई राज्यों में वितरित रहा।
3. उपग्रह और लॉन्च वेहिकल - इन दोनों घटकों पर इसरो का प्रदर्शन कैसा रहा है ?
4. SpaceX जैसी निजी संस्थाओं ने इसरो के सामने क्या चुनौतियाँ रखी हैं?

सुनिए और बताइये कैसा लगा आपको @puliyabaazi या फिर puliyabaazi@gmail.comपर।

In this episode of Puliyabaazi we take a close look at India's space programme with Pavan Srinath, fellow and faculty at the Takshashila Institution and a host of Thale-Harate and Pragati podcasts.

We discussed the impact that space research has for an aspirational society and why the argument 'poor nations shouldn't spend on luxuries like space exploration’ makes little logical sense. We then move on to discuss the beginnings of India's tryst with space. Pavan then takes us through the two components of the space programme - satellites and launch vehicles. Do let us know in puliyabaazi@gmail.com if you have any thoughts to share.

Ep. 25: परदेसी परदेसी जाना नहीं

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‘मेरे पिया गए रंगून, वहाँ से किया है टेलीफून” याद आया न यह गाना? लेकिन आपने सोचा कि इनके पिया आख़िर क्यों और कैसे रंगून पहुंचे? आम धारणा यह है कि भारत में अक़्सर लोग जिस गाँव में जन्म लेते थे, उसी में पूरा जीवन व्यतीत कर देते थे | लेकिन हमारे इस एपिसोड के सह-पुलियाबाज़ चिन्मय तुम्बे बताते है कि भारत का प्रवास याने कि migration के साथ अटूट रिश्ता है | चिन्मय १० साल से migration पर शोध कर रहे है और उन्होंने अपनी किताब India Moving: A History of Migration में भारतीय समाज और migration के कई अनोखे किस्सों का अध्ययन किया है | आपको ज़रूर मज़ा आएगा यह एपिसोड सुनकर!

Everyone of us has a migration story. And yet the term migrant often becomes problematic. So in this week’s Puliyabaazi, we spoke to Chinmay Tumbe, a scholar of Indian migrations and author of the magisterial India Moving: A History of Migration. We discussed Indian communities that are prolific at migration. We also discussed if there is anything like a ‘good migrant’.

Ep. 24: धरती के बर्फीले छोरों से कहानी Climate Change की

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जलवायु परिवर्तन (climate change) के भीषण प्रभावों पर आंकड़े तो स्पष्ट हैं लेकिन फिर भी हम और हमारी सरकारें इस वैश्विक समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे | तो इस पुलियाबाज़ी में हमने सीधे बात की ऐसे क्लाइमेट सेनानी से जो क्लाइमेट चेंज के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए धरती के दोनों बर्फीले ध्रुवों तक ही पहुँच गए | सुनिए हमारी पुलियाबाज़ी राजा कार्तिकेय से जिन्होंने एक साल के भीतर ही अंटार्कटिक और आर्कटिक ध्रुवों का दौरा किया | पेशे से राजा सयुंक्त राष्ट्र में राजनैतिक अफ़सर है और उनकी अपनी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है |

उन्होंने समझाया कि आज के क्लाइमेट में बदलाव का कारण भले ही पश्चिमी देश हो पर इसका भारत जैसे देशों पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा | न सिर्फ तटवर्ती इलाक़े बल्कि भारत के अंदरूनी उत्तरी भाग भी इससे बदल जाएंगे | इसीलिए हमारे समाज और सरकारों को इस समस्या का सामना करने की तैयारी आज करनी होगी | तो क्या है वह कदम, जानने के लिए शामिल हो जाइये इस पुलियाबाज़ी में |

Ep. 23: Arthashashtra Part 2: Foreign Policy कैसी होनी चाहिए?

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Real estate से लेकर business advice तक, कौटिल्य नीति को बिना सिर पैर उपयोग करने की होड़ लगी है आजकल | अर्थशास्त्र को ignore करना तो ग़लत है ही, पर उसे ग़लत समझना और भी हानिकारक है | तो कौटिल्य अर्थशास्त्र से जुड़ी कई ग़लतफ़हमियों को ठीक करने के लिए हमने की पुलियाबाज़ी कजरी कमल से जो कि ‘अर्थशास्त्र और Indian Strategic Culture’ पर PhD कर रही हैं हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय से | कजरी तक्षशिला इंस्टीटूशन के Graduate certificate in Strategic Studies में ‘अर्थशास्त्र और भारतीय विदेश नीति’ course पढ़ाती है |

यह पुलियाबाज़ी दो भागों में है | पहले भाग में सुनिए चर्चा अर्थशास्त्र के उद्देश्य और मूलतत्वों पर | दूसरे एपिसोड में सुनिए कि चाणक्य विदेश नीति के बारे में क्या सिखाते है |

Ep. 22: Arthashashtra Part 1: साम, दाम, भेद, दंड से परे

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Real estate से लेकर business advice तक, कौटिल्य नीति को बिना सिर पैर उपयोग करने की होड़ लगी है आजकल | अर्थशास्त्र को ignore करना तो ग़लत है ही, पर उसे ग़लत समझना और भी हानिकारक है | तो कौटिल्य अर्थशास्त्र से जुड़ी कई ग़लतफ़हमियों को ठीक करने के लिए हमने की पुलियाबाज़ी कजरी कमल से जो कि ‘अर्थशास्त्र और Indian Strategic Culture’ पर PhD कर रही हैं हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय से | कजरी तक्षशिला इंस्टीटूशन के Graduate certificate in Strategic Studies में ‘अर्थशास्त्र और भारतीय विदेश नीति’ course पढ़ाती है |

यह पुलियाबाज़ी दो भागों में है | पहले भाग में सुनिए चर्चा अर्थशास्त्र के उद्देश्य और मूलतत्वों पर | दुसरे एपिसोड में सुनिए कि चाणक्य विदेश नीति के बारे में क्या सिखाते है |

Ep. 20: परमाणु हथियार:इस ब्रह्मास्त्र से कैसे बचें?

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इस साल के शुरू होते ही अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक ट्वीट में उत्तर कोरिया को चेताया था कि अमरीका के परमाणु हथियार उत्तर कोरिया के मुक़ाबले कई ज़्यादा प्रभावशाली है | इस एक ट्वीट से ही सारी दुनिया काँप गयी थी | तो इस पुलियाबाज़ी में हमने परमाणु हथियार और उनकी राजनीति पर ग़ौर किया लेफ्टिनेंट जनरल प्रकाश मेनन के साथ |

जनरल मेनन ४० साल सैन्य विषयों पर काम कर चुके है | उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल सहित कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया है | आजकल वे तक्षशिला इंस्टीट्नयूशन में स्ट्रैटिजिक नीति के बुनियादी सिद्धांत सिखाते है | जनरल मेनन की किताब The Strategy Trap भारत, पाकिस्तान और चीन की परमाणु नीतियों का विश्लेषण करती है |