Ep. 21: Raid के पीछे, एक टैक्स अफ़सर की ज़ुबानी

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मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘नमक का दरोगा’ एक ईमानदार टैक्स इंस्पेक्टर के सामने आने वाली चुनौतियों की अमर दास्ताँ है | तो इस बार पुलियाबाज़ी में हमने समझना चाहा कि एक युवा सरकारी अफ़सर की ज़िन्दगी आख़िर कैसी होती है ? क्यों आज भी कुछ इंजीनियर और डॉक्टर सरकारी अफ़सर बनना पसंद करते है ?

यह सब बताया हमें सलिल बिजूर ने, जो आयकर विभाग के इन्वेस्टीगेशन विंग में डिप्टी डायरेक्टर है | इस पुलियाबाज़ी में उन्होंने बताया कि लोग टैक्स बचाने के लिए क्या-क्या नायाब तरीक़े अपनाते है | उन्होंने टैक्स व्यवस्था में सुधार करने के भी कुछ सुझाव दिए |